झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार का दिन छात्रों के आक्रोश के नाम रहा। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हजारों छात्रों ने सोमवार को झारखंड विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया था। सुबह से ही राज्य के कोने-कोने से आए छात्र सड़कों पर उतर आए और पुलिस के तमाम सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए विधानसभा की ओर बढ़ने लगे।
इस बड़े छात्र आंदोलन को लेकर जहां पूरा झारखंड सुलग रहा था, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं की आवाज बनने का दावा करने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की चुप्पी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में दिल्ली में नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ एक महीने से अधिक समय तक मुखर होकर आंदोलन करने वाली CJP इस बार झारखंड के मुद्दों पर उतनी सक्रिय नजर नहीं आई।
रांची के रण में क्यों नदारद रहे CJP के बड़े चेहरे?
सोमवार को हुए 'विधानसभा घेराव' के दौरान रांची में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। छात्रों को रोकने के लिए प्रशासन ने कंटीले तार लगाए और पानी की बौछारें कीं, लेकिन युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
इतनी बड़ी घटना के बावजूद CJP के मुख्य सोशल मीडिया हैंडल और कई दिग्गज प्रवक्ताओं की खामोशी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। यह खबर लिखे जाने तक पार्टी के तेज-तर्रार प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका के सोशल मीडिया हैंडल्स से झारखंड के छात्रों के समर्थन में कोई ठोस बयान या अपील सामने नहीं आई थी। हालांकि, आशुतोष रांका और सौरभ दास के अकाउंट्स से जंतर-मंतर पर हुए बल प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमले जरूर किए जा रहे थे।
अभिजीत दीपके ने सिर्फ पूरी की 'रस्म अदायगी'?
पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सिर्फ एक औपचारिकता (रस्म अदायगी) पूरी की। उन्होंने झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के मार्च में शामिल होने का एक वीडियो शेयर करते हुए अंग्रेजी में महज इतना लिखा— 'झारखंड के प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता।'
सूत्रों के अनुसार, जब से झारखंड में छात्रों का यह नया आंदोलन शुरू हुआ है, तब से अभिजीत दीपके और उनकी टीम के रांची जाने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। पहले पार्टी की ओर से गोलमोल जवाब दिए गए, और बाद में दीपके ने स्वास्थ्य कारणों (टाइफाइड) का हवाला देते हुए झारखंड जाने में असमर्थता जताई। हालांकि, पार्टी की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल को जरूर रांची भेजा गया था, लेकिन जंतर-मंतर आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे कोई भी बड़े राष्ट्रीय नेता मौके पर नहीं पहुंचे।
राजनीतिक गलियारों में उठ रहे सवाल
विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय स्तर पर होने वाले ऐसे बड़े युवा आंदोलनों से दूरी बनाना किसी भी नई राजनीतिक पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। एक तरफ जहां छात्र अपनी भविष्य की लड़ाई के लिए सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय पार्टियों और संगठनों से उन्हें जिस आक्रामक समर्थन की उम्मीद थी, वह इस बार नदारद दिखा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- प्रश्न 1: झारखंड में छात्रों ने विधानसभा का घेराव क्यों किया?
- उत्तर: छात्र जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के विरोध में पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।
- प्रश्न 2: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने झारखंड आंदोलन पर क्या रुख अपनाया?
- उत्तर: CJP के बड़े नेताओं ने इस आंदोलन पर लगभग चुप्पी साधी रखी। संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सिर्फ एक औपचारिकता पूरी की, जबकि अन्य नेता दिल्ली के मुद्दों पर ही व्यस्त दिखे।
- प्रश्न 3: क्या CJP ने झारखंड में छात्रों की मदद के लिए किसी को भेजा?
- उत्तर: हां, पार्टी के शीर्ष नेता खुद रांची नहीं पहुंचे, लेकिन उनकी ओर से एक प्रतिनिधिमंडल को जरूर झारखंड भेजा गया था।