नई दिल्ली: भारत के सुरक्षा तंत्र और बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की बयार बह रही है। कभी पुरुषों का एकाधिकार माने जाने वाले दुर्गम सीमा सुरक्षा और सैन्य निर्माण के क्षेत्र में अब देश की बेटियां अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर नेतृत्व कर रही हैं। गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिक महेंद्र पाल सिंह रावत के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक सक्षम और आत्मनिर्भर भारत की नई तस्वीर है।
बीआरओ (BRO) में रचा गया नया इतिहास
भारतीय सेना और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में महिला अधिकारियों की भूमिका अब महज प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है। कर्नल स्फूर्ति कुलकर्णी और कर्नल शिखा भदौरिया जैसे जांबाज अधिकारियों ने बेहद संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक संपर्क व्यवस्था बनाए रखने वाली फील्ड यूनिटों की कमान संभाली है।
"हमारी छोरियां, हमारे छोरों से कम नहीं हैं" — यह कहावत आज देश की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सच साबित हो रही है।
प्रोजेक्ट चेतक और पश्चिमी सीमा पर ऐतिहासिक उपलब्धि
सीमा सड़क संगठन में महिला नेतृत्व की दिशा में हाल की उपलब्धियां बेहद खास हैं। कर्नल स्फूर्ति कुलकर्णी ने प्रोजेक्ट चेतक के अंतर्गत 45 टास्क फोर्स की कमान संभालकर एक नया इतिहास रचा है। वह भारत की पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक सड़क निर्माण से जुड़ी टास्क फोर्स का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनी हैं।
इन अधिकारियों के नेतृत्व वाली इकाइयां सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, पुलों और अन्य सामरिक ढांचागत सुविधाओं का निर्माण कर रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बनने वाले ये मार्ग सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि सैनिकों, सैन्य रसद और स्थानीय नागरिकों के लिए जीवनरेखा हैं।
कठिन परिस्थितियों में असाधारण निर्णय क्षमता
सीमावर्ती इलाकों में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। प्रतिकूल मौसम, दुर्गम भूभाग और सुरक्षा संवेदनशीलता के बीच निर्माण कार्यों को गति देना असाधारण अनुशासन और नेतृत्व क्षमता की मांग करता है। कर्नल शिखा भदौरिया और कर्नल स्फूर्ति कुलकर्णी की ये नियुक्तियां दर्शाती हैं कि भारतीय सैन्य व्यवस्था में केवल योग्यता और पेशेवर दक्षता को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
समान अवसर और संस्थागत सहयोग की जरूरत
हालांकि, पूर्व सैनिकों का मानना है कि नारी सशक्तीकरण केवल पदों या आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए संस्थागत स्तर पर निम्नलिखित कदम अनिवार्य हैं:
- सुरक्षित और अनुकूल कार्य वातावरण।
- समान पेशेवर अवसर और निष्पक्ष पदोन्नति प्रणाली।
- दुर्गम क्षेत्रों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का निरंतर विकास।
राष्ट्र निर्माण में बेटियों की नई मिसाल
भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव साहस और शक्ति का स्वरूप माना गया है। आज जब बेटियां वर्दी पहनकर देश की सीमाओं को सुरक्षित और मजबूत बना रही हैं, तो यह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह प्रगति साबित करती है कि जब बेटियों को सही अवसर और मंच मिलता है, तो वे राष्ट्र सेवा के हर इम्तिहान में परचम लहरा सकती हैं।