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बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से थे पीड़ित; बलिया में शोक की लहर

बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से थे पीड़ित; बलिया में शोक की लहर

उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के वरिष्ठ नेता और प्रदेश में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। वह लंबे समय से घातक बीमारी कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

लंबे समय से गंभीर बीमारी से थे पीड़ित

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमाशंकर सिंह का इलाज पिछले काफी समय से दिल्ली और लखनऊ के शीर्ष अस्पतालों में चल रहा था। कैंसर से लड़ाई लड़ते हुए अंततः उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके परिजनों और समर्थकों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।

"रसड़ा की जनता से उनका जुड़ाव केवल एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा था। उनका जाना बसपा ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की राजनीति के लिए बड़ा झटका है।"

विरोधी लहर में भी बचाई थी पार्टी की साख

उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के अकेले ध्वजवाहक थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला था और बसपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, तब भी उमाशंकर सिंह ने बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से अपनी बादशाहत बरकरार रखी थी।

उनकी राजनीतिक पकड़ और जनता के बीच लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे रसड़ा सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे।

राजनीतिक सफर और जनसेवा की मिसाल

  • रसड़ा से लगातार जीत: वे बलिया के रसड़ा क्षेत्र से लगातार विधानसभा पहुंचे और हर वर्ग में अपनी मजबूत पैठ बनाई।
  • बसपा के संकटमोचक: विधानसभा के भीतर और बाहर वे बीएसपी के प्रमुख चेहरे और नीतिगत आवाज बने रहे।
  • समाजसेवा में आगे: क्षेत्र में धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।

दिग्गज नेताओं ने जताया गहरा शोक

उमाशंकर सिंह के असमय निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मायावती समेत उत्तर प्रदेश के तमाम दिग्गज राजनेताओं ने उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया है। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने क्षेत्र के विकास और गरीब-वंचितों के हक की लड़ाई लड़ी।

बलिया स्थित उनके पैतृक आवास पर अंतिम दर्शनों के लिए लोगों का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया है। उनके अंतिम संस्कार की तारीख और समय की घोषणा जल्द ही परिजनों द्वारा की जाएगी।

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रिपोर्टर: Kavya Tripathi

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