उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में जनसमस्याओं को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। सकलडीहा क्षेत्र की बदहाल सड़कों, खेतों तक पानी न पहुँचने की सिंचाई समस्या और अधर में लटकी जल जीवन मिशन की योजनाओं पर अब मानवाधिकार संगठन ने आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
सकलडीहा से स्टेशन जाने वाला रास्ता बना मुसीबत
सकलडीहा कस्बे से रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली मुख्य सड़क लंबे समय से जर्जर हाल में है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए यह मार्ग बेहद अहम है, लेकिन वर्तमान में यहाँ से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं।
संगठन के जिलाध्यक्ष विजय तिवारी के अनुसार, सड़क पर अधूरा आरसीसी निर्माण और पटरियों का गायब होना हादसों को दावत दे रहा है। रोजाना हजारों राहगीर और वाहन चालक इस खस्ताहाल रास्ते पर धूल-धूसरित होने और दुर्घटनाओं का शिकार होने को मजबूर हैं।
सूखी पड़ीं नहरें, टेल तक नहीं पहुँचा पानी
कृषि प्रधान इस इलाके में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। मूसाखांड बांध से निकलने वाले बढ़वल रजवाहा की सफाई केवल खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है।
- प्रभावित क्षेत्र: नरैना, बरठी, देवाकरपुर और पौरा बहरवानी परगना क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं।
- मुख्य समस्या: सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई, जिससे पानी अंतिम छोर (टेल) तक नहीं पहुँच पा रहा।
- खेती पर असर: पानी न मिलने से हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि में फसलें प्रभावित हो रही हैं और किसानों की लागत डूबने की कगार पर है।
पेंशन, घरौनी और जल जीवन मिशन के अधूरे दावे
संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से केवल सड़कों और सिंचाई पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े किए:
- जल जीवन मिशन: कई गाँवों में पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा पड़ा है। तहसील प्रशासन द्वारा नियमित समीक्षा न होने से ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा।
- वृद्धा पेंशन: क्षेत्र की कई जरूरतमंद और बुजुर्ग महिलाएँ पेंशन का लाभ पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को विवश हैं।
- घरौनी वितरण: बरठी, सकलडीहा और नरैना जैसे गाँवों में पात्र ग्रामीणों को अब तक घरौनी प्रमाण पत्र नहीं दिए गए हैं।
blockquote>"सड़क, पानी, पेंशन और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाएँ जनता का अधिकार हैं। यदि जिला प्रशासन ने तय समय के भीतर इन समस्याओं का निस्तारण नहीं किया, तो हम पूरे मामले को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।" — विजय तिवारी, जिलाध्यक्ष
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के तमाम पदाधिकारी उपस्थित रहे। अब देखना यह होगा कि इस अल्टीमेटम के बाद जिला प्रशासन धरातल पर क्या कदम उठाता है।