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पूर्व सैनिकों के लिए ECHS का बड़ा तोहफा: न्यूरो-इम्प्लांट्स की दरों में संशोधन, जानें किसे और कैसे मिलेगा फायदा

पूर्व सैनिकों के लिए ECHS का बड़ा तोहफा: न्यूरो-इम्प्लांट्स की दरों में संशोधन, जानें किसे और कैसे मिलेगा फायदा

देश के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। पूर्व सैनिक कल्याण विभाग (Department of Ex-Servicemen Welfare - DESW) ने एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के तहत दिए जाने वाले न्यूरो-इम्प्लांट्स (Neuro-Implants) के खर्च की अनुमति और रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) की दरों में बड़ा संशोधन किया है।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार: क्या है सरकार का यह नया कदम?

न्यूरोलॉजिकल और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले न्यूरो-इम्प्लांट्स काफी महंगे होते हैं। 7 अगस्त को जारी नए सरकारी आदेश के तहत, पूर्व सैनिकों को अब इन महंगे मेडिकल डिवाइसेज के इलाज और क्लेम में किसी तरह की आर्थिक या प्रशासनिक अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में साफ किया गया है कि अब न्यूरो-इम्प्लांट्स की दरों को नए मेडिकल स्टैंडर्ड्स और बाजार की स्थितियों के अनुसार पुनरीक्षित (Revise) किया गया है, ताकि ईसीएचएस लाभार्थियों को जेब से अधिक पैसा न खर्च करना पड़े।

किन गंभीर बीमारियों के इलाज में मिलेगा सीधा फायदा?

न्यूरो-इम्प्लांट्स का इस्तेमाल आमतौर पर उन बीमारियों में किया जाता है जहाँ दवाएं बेअसर साबित होती हैं। इस संशोधन का सबसे अधिक लाभ निम्नलिखित बीमारियों से पीड़ित पूर्व सैनिकों को मिलेगा:

  • पार्किंसंस (Parkinson's Disease): डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) इम्प्लांट्स के लिए।
  • मिर्गी और पुराने दौरे (Refractory Epilepsy): वेगल नर्व स्टिमुलेशन (VNS) डिवाइसेज।
  • रीढ़ की हड्डी और नस दर्द (Chronic Pain): स्पाइनल कॉर्ड स्टिमुलेटर (SCS)।
  • मांसपेशियों में अत्यधिक ऐंठन (Spasticity): इंट्राथेकल बैक्लोफेन पंप (ITB Pump)।
"हमारे पूर्व सैनिक जिन्होंने देश की सुरक्षा में अपना जीवन दिया है, उन्हें अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा बिना किसी वित्तीय बोझ के मिलना उनका अधिकार है। न्यूरो-इम्प्लांट्स की दरों में यह संशोधन इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।"

अनुमति और क्लेम प्रक्रिया: कैसे करें आवेदन?

ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक और एम्पैनल्ड अस्पतालों (Empaneled Hospitals) के माध्यम से क्लेम या पूर्व-अनुमति (Prior Approval) प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:

1. मेडिकल स्पेशलिस्ट की सिफारिश: संबंधित न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन द्वारा इम्प्लांट की जरूरत का स्पष्ट पर्चा (Prescription) होना चाहिए।

2. पॉलीक्लिनिक से रेफरल: ECHS पॉलीक्लिनिक के मेडिकल ऑफिसर से डिवाइस और प्रक्रिया की पूर्व-अनुमति (Prior Approval) प्राप्त करें।

3. क्लेम सबमिशन: यदि इलाज एम्पैनल्ड अस्पताल में नहीं हुआ है या आपात स्थिति में कराया गया है, तो सभी ओरिजिनल बिल और मेडिकल रिपोर्ट्स के साथ ऑनलाइन ईसीएचएस पोर्टल पर रिइम्बर्समेंट क्लेम जमा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या इस संशोधन के बाद पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए जेब से पैसे देने होंगे?

नहीं, यदि आप ECHS एम्पैनल्ड अस्पताल में पूर्व-अनुमति के साथ इलाज कराते हैं, तो यह सुविधा पूरी तरह कैशलेस होगी। गैर-एम्पैनल्ड या इमरजेंसी की स्थिति में संशोधन दरों (Revised Rates) के आधार पर शत-प्रतिशत क्लेम वापस मिलेगा।

2. क्या यह नई दरें पुराने पेंडिंग क्लेम पर भी लागू होंगी?

आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, यह दरें जारी होने की तारीख से लागू होंगी। हालांकि, बोर्ड द्वारा समीक्षाधीन मामलों पर विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है।

3. न्यूरो-इम्प्लांट्स के लिए क्लेम फाइल करने की अंतिम समय सीमा क्या है?

सामान्य नियमों के अनुसार, डिस्चार्ज होने या डिवाइस इम्प्लांट होने की तारीख से 3 महीने (90 दिन) के भीतर रिइम्बर्समेंट क्लेम पॉलीक्लिनिक में जमा कर देना चाहिए।

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रिपोर्टर: Tannu Upadhyay

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