क्या आपने कभी सोचा है कि देश की सरकारी खरीद में महिलाओं की भागीदारी किस स्तर पर पहुंच चुकी है? आज डिजिटल भारत की ताकत ने देश के कोने-कोने में बैठे सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSME) की तस्वीर बदल दी है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जेम (GeM) पोर्टल ने देश के कारोबार जगत में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है, जिसकी गूंज अब नीतिगत गलियारों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सुनाई दे रही है।
हाल ही में जेम पोर्टल के 10वें स्थापना दिवस पर जारी हुई सालाना रिपोर्ट ने चौंकाने वाले और बेहद उत्साहजनक आंकड़े सामने रखे हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, पोर्टल के जरिए महिला संचालित सूक्ष्म और लघु उद्योगों ने 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक का शानदार कारोबार किया है। आखिर कैसे मुमकिन हुआ यह सब और कैसे सरकारी टेंडर पाने की जटिल प्रक्रिया अब महिलाओं के लिए बेहद आसान बन चुकी है? आइए जानते हैं इस पूरी सफलता की कहानी को गहराई से।
जेम पोर्टल: डिजिटल भारत का वह मंच जिसने बदल दिए नियम
पारदर्शिता और सुगमता की मिसाल बन चुका जेम पोर्टल आज सरकारी खरीद का सबसे बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुका है। शुरुआत से लेकर अब तक इस पोर्टल के माध्यम से कुल 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड खरीदारी की जा चुकी है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा है कि देश में सरकारी खरीदारी का ढांचा अब पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त हो चुका है।
आज इस पोर्टल पर लगभग 1.37 लाख सरकारी खरीदार मौजूद हैं, जो देश के करीब 25 लाख से अधिक विक्रेताओं से लगातार कारोबार कर रहे हैं। इस विशाल बाजार में देश के छोटे-छोटे व्यापारियों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे सरकार को अपना सामान बेचने का मौका मिल रहा है, और इसमें सबसे बड़ा फायदा महिला उद्यमियों को होता दिख रहा है।
महिला उद्यमियों के लिए कैसे वरदान बना GeM पोर्टल?
पारंपरिक बाजार में महिलाओं के लिए अपने उत्पादों को बड़े पैमाने पर बेचना और सरकारी विभागों तक पहुंच बनाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन जेम पोर्टल ने इस खाई को पाटने का काम किया है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 2.1 लाख से अधिक ऐसे सूक्ष्म एवं लघु उद्योग पंजीकृत हैं, जिन्हें महिलाएं चला रही हैं।
"महिला संचालित उद्योगों से 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी होना यह साबित करता है कि अब देश की आधी आबादी केवल घर नहीं संभाल रही, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के पहिये को भी मजबूती से आगे बढ़ा रही है।"
पोर्टल द्वारा तैयार किए गए इस डिजिटल रास्ते ने महिला उद्यमियों को सीधे सरकारी विभागों तक अपने उत्पाद और सेवाएं पहुंचाने का सुनहरा अवसर दिया है। चाहे हैंडीक्राफ्ट हो, ऑफिस के सामान हों या फिर तकनीकी सेवाएं, महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स और एमएसएमई ने अपनी गुणवत्ता के दम पर सरकारी खरीदारों का भरोसा जीता है।
मेक इन इंडिया और सेना की बड़ी भूमिका
इस पूरी डिजिटल क्रांति में 'मेक इन इंडिया' और रक्षा क्षेत्र का योगदान भी बेहद खास रहा है। जेम पोर्टल से हुई कुल 20 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी में अकेले भारतीय सेना ने 1.35 लाख करोड़ रुपये के सामान और सेवाओं की खरीद की है।
आंकड़ों के अनुसार, कुल सरकारी खरीद में अकेले सेना की हिस्सेदारी करीब 14.93 फीसदी रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि देश की सुरक्षा में तैनात हमारे प्रहरी स्वदेशी उत्पादों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देने में सबसे आगे हैं।
कर्नाटक और बंगलूरू बने महिला कारोबार के नए गढ़
क्षेत्रीय स्तर पर बात करें तो देश के सभी राज्यों में एमएसएमई और महिला पंजीकरण के मामले में कुछ नाम विशेष रूप से उभरकर सामने आए हैं। देशभर में जेम पोर्टल पर 11.75 लाख एमएसएमई पंजीकृत हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा 55,053 एमएसएमई अकेले कर्नाटक के हैं।
- कुल पंजीकृत एमएसएमई (कर्नाटक): 55,053
- बंगलूरू के कुल विक्रेता: 16,091
- कुल पंजीकृत महिला उद्यमी (पूरे देश में): 2,17,155
- कर्नाटक की महिला उद्यमी: 10,896
- अकेले बंगलूरू की महिला उद्यमी: 3,052
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि कर्नाटक और विशेष रूप से बंगलूरू का स्टार्टअप इकोसिस्टम महिला कारोबारियों के लिए एक प्रमुख हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य की हजारों महिलाएं आज डिजिटल माध्यम से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं।
आगे की राह: क्यों खास है यह बदलाव?
सरकारी खरीद में महिलाओं की यह बढ़ती हिस्सेदारी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक बानगी है। जब एक महिला उद्यमी को सरकार से बड़ा टेंडर मिलता है, तो न सिर्फ उसका व्यवसाय बढ़ता है, बल्कि उसके आसपास की दर्जनों अन्य महिलाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिलते हैं।
सरकार की नीतियां और जेम पोर्टल जैसी पहले यह सुनिश्चित कर रही हैं कि देश के विकास में हर वर्ग की, विशेषकर महिलाओं की बराबर की भागीदारी हो। आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि देश के छोटे शहरों और गांवों की महिलाएं भी अब डिजिटल साक्षरता के दम पर ग्लोबल और नेशनल मार्केट का हिस्सा बन रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. जेम (GeM) पोर्टल क्या है?
जेम पोर्टल (Government e-Marketplace) एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग देश के सभी सरकारी विभाग और मंत्रालय अपने दैनिक उपयोग के सामान और सेवाओं की पारदर्शी खरीद के लिए करते हैं।
2. महिला उद्यमियों के लिए जेम पोर्टल पर पंजीकरण कैसे मददगार है?
इसके जरिए महिला संचालित सूक्ष्म और लघु उद्योग (MSME) बिना किसी बिचौलिए के सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद बेच सकती हैं, जिससे उनके कारोबार का दायरा तेजी से बढ़ता है।
3. अब तक जेम पोर्टल के जरिए कुल कितना कारोबार हो चुका है?
शुरुआत से लेकर अब तक इस पोर्टल के माध्यम से लगभग 20 लाख करोड़ रुपये की कुल सरकारी खरीदारी हो चुकी है, जिसमें महिलाओं का योगदान 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है।