Hospital Negligence Viral Video: जब जिंदगी और मौत के बीच महज कुछ मिनटों की दूरी हो, तब सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। देश के एक सरकारी अस्पताल से ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था और कर्मचारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इमरजेंसी के बाहर चीख-पुकार, अंदर वीडियो कॉल पर आशिकी!
यह पूरा मामला अस्पताल के इमरजेंसी बिलिंग काउंटर का है। बाहर एक गर्भवती महिला गंभीर हालत में दर्द से कराह रही थी। परिजनों को उसे तुरंत इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने के लिए पर्चे और बिलिंग की सख्त जरूरत थी। लेकिन काउंटर पर बैठा कर्मचारी बाहर खड़ी भीड़ और तड़पती महिला से बेखबर, अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फोन पर वीडियो कॉल में मशगूल था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कर्मचारी चेहरे पर मुस्कान लिए स्क्रीन में खोया हुआ था, जबकि खिड़की के बाहर से मरीज के रिश्तेदार बिल काटने के लिए हाथ जोड़ रहे थे और चिल्ला रहे थे।
भाई साहब! जल्दी पर्चा काट दो, मरीज की हालत बेहद गंभीर है, जान निकल रही है..." – बाहर खड़े लोग बार-बार गुहार लगाते रहे, लेकिन काउंटर पर बैठे कर्मचारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
संवेदनहीनता की हद: जिंदगी पर भारी पड़ी चंद मिनटों की लापरवाही
इमरजेंसी सेवाओं में हर एक सेकंड की कीमत होती है। जब किसी गंभीर मरीज को अस्पताल लाया जाता है, तो कागजी खानापूर्ति में देरी सीधे मौत का कारण बन सकती है। इसके बावजूद, जिम्मेदारी के पद पर बैठे कर्मचारी का इस तरह का रवैया न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि अमानवीय भी है।
सोशल मीडिया पर इस घटना की जानकारी और वीडियो सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। आम जनता और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बेपरवाह कर्मचारियों को केवल चेतावनी देकर छोड़ना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें तुरंत सेवा से बर्खास्त या निलंबित (Suspend) किया जाना चाहिए।
अस्पताल प्रशासन और सेवा नियमों पर उठे 3 बड़े सवाल
- क्या ड्यूटी पर पर्सनल वीडियो कॉल की इजाजत है? इमरजेंसी और बिलिंग जैसे अति-संवेदनशील काउंटरों पर तैनात कर्मचारियों के लिए पर्सनल फोन का ऐसा इस्तेमाल सख्त अनुशासनहीनता है।
- इलाज से पहले कागजी खानापूर्ति क्यों? नियमों के मुताबिक, यदि मरीज की हालत नाजुक है तो पहले इलाज शुरू होना चाहिए, पर्ची का काम बाद में भी किया जा सकता है।
- सख्त कार्रवाई का अभाव: अक्सर ऐसे मामलों में जांच के नाम पर लीपापोती कर दी जाती है, जिससे ऐसे कर्मचारियों के हौसले बुलंद रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अगर सरकारी अस्पताल में कोई कर्मचारी काम करने से मना करे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (CMS), ऑन-ड्यूटी डॉक्टर, या फिर राज्य सरकार के स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
2. क्या अति-गंभीर स्थिति (Critical Condition) में बिलिंग का इंतजार करना जरूरी है?
बिल्कुल नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज को तुरंत प्राथमिक उपचार (Emergency Medical Care) देना अनिवार्य है, कागजी प्रक्रिया बाद में भी पूरी की जा सकती है।