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भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत, ₹1 लाख करोड़ के टेंडर से चमकेगी किस्मत

भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत, ₹1 लाख करोड़ के टेंडर से चमकेगी किस्मत

क्या आपने कभी सोचा है कि जब देश की सीमाओं पर अचानक कोई बड़ा संकट आता है, तो हमारे जांबाज सैनिकों और भारी-भरकम साजो-सामान को पलक झपकते ही एक कोने से दूसरे कोने तक कैसे पहुंचाया जाता है? इसका जवाब है—मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट। जी हां, रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले भारतीय वायुसेना के इन पुराने हो रहे कार्गो विमानों के बेड़े को अब एक नया और अत्याधुनिक रूप मिलने जा रहा है।

केंद्र सरकार ने देश की सामरिक ताकत को सातवें आसमान पर पहुंचाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने के लिए आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है। यह डील न सिर्फ भारतीय वायुसेना की रसद क्षमता को पंख लगाएगी, बल्कि 'मेक इन इंडिया' के तहत देश को रक्षा निर्माण का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।

आखिर क्या है इस 1 लाख करोड़ की मेगा डिफेंस डील का पूरा गणित?

भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में शामिल एवरो और एन-32 जैसे पुराने ट्रांसपोर्ट विमान अब अपनी उम्र पूरी कर रहे हैं। ऐसे में उनकी जगह लेने के लिए एक ऐसे दमदार और भरोसेमंद विकल्प की जरूरत थी, जो हर मौसम और हर परिस्थिति में अपनी सेवाएं दे सके।

इस बड़े टेंडर के तहत कुल 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदे जाने हैं। खास बात यह है कि इस पूरी परियोजना में भारत की निजी और सरकारी दिग्गजों को मुख्य भूमिका सौंपी गई है। इसमें देश की डिफेंस दिग्गज हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ-साथ टाटा और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियां भी आमने-सामने और साझेदार के रूप में नजर आ रही हैं।

मैदान में कौन-सी दिग्गज कंपनियां और उनके विदेशी पार्टनर?

रक्षा जगत की इस सबसे बड़ी जंग में भारत की निजी कंपनियों ने विदेशी विमान निर्माताओं के साथ हाथ मिलाया है। मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का है:

  • महिंद्रा डिफेंस और एम्ब्राएर (Embraer): महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की प्रतिष्ठित विमान निर्माता कंपनी एम्ब्राएर के साथ मजबूत साझेदारी की है। इस डील के तहत उनके विश्वप्रसिद्ध C-390 मिलेनियम ट्रांसपोर्ट विमान की पेशकश की जा रही है, जो अपनी आधुनिक तकनीक और क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
  • टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin): टाटा समूह ने अमेरिका की दिग्गज डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ हाथ मिलाया है। इसके जरिए अमेरिका के भरोसेमंद C-130 सुपर हरक्यूलिस विमान को मैदान में उतारा गया है। गौरतलब है कि C-130 पहले से ही भारतीय वायुसेना के स्पेशल ऑपरेशन विंग का एक अहम हिस्सा है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की HAL: सरकारी कंपनी HAL भी इस पूरी रेस में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही है और देश के भीतर ही निर्माण कार्यों की कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।

कितने विमान विदेश से आएंगे और कितने भारत में बनेंगे?

इस मेगा प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी इसका 'आत्मनिर्भर भारत' विजन है। रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, इस पूरी डील का गणित कुछ इस प्रकार तय किया गया है:

प्रोजेक्ट की शुरुआत के तहत लगभग 20 प्रतिशत विमान सीधे तैयार स्थिति में (Fly-away condition) विदेशी पार्टनर से भारतीय वायुसेना को सौंपे जाएंगे, ताकि तुरंत आ रही जरूरतों को पूरा किया जा सके। वहीं, बाकी के बचे हुए भारी-भरकम संख्या में विमानों का निर्माण भारत की धरती पर ही किया जाएगा

लक्ष्य यह है कि इन स्वदेशी रूप से बनने वाले विमानों में 60 प्रतिशत से अधिक सामग्री (Indigenous Content) भारत की ही हो। इनका निर्माण भारतीय कंपनियों और मूल विदेशी उपकरण निर्माताओं (OEMs) के बीच बनने वाले ज्वॉइंट वेंचर्स (Joint Ventures) के माध्यम से होगा।

सिर्फ सैनिकों की ढुलाई ही नहीं, ये विमान हवा में भरेंगे ईंधन!

आम तौर पर लोग ट्रांसपोर्ट विमानों का काम सिर्फ सैनिकों और राशन-बंदूकों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मानते हैं। लेकिन आधुनिक मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की क्षमताएं इससे कहीं ज्यादा व्यापक हैं।

भारतीय वायुसेना इन नए विमानों का इस्तेमाल बेहद रणनीतिक कामों में करने की योजना बना रही है। जरूरत पड़ने पर इन विमानों को एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर (Mid-air refueling tanker) के रूप में भी बदला जा सकेगा, जो आसमान में ही हमारे फाइटर जेट्स में ईंधन भर सकेंगे। इसके अलावा, आपदा राहत अभियानों, घायलों को निकालने (Medical Evacuation) और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भारी सैन्य उपकरणों को पैराशूट के जरिए गिराने में ये विमान गेम-चेंजर साबित होंगे।

वायुसेना के आधुनिकीकरण की ओर एक और बड़ा कदम

यह 1 लाख करोड़ का टेंडर अकेले नहीं आया है, बल्कि यह भारतीय वायुसेना के अब तक के सबसे बड़े आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। वर्तमान में वायुसेना के पास पहले से ही 12 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान मौजूद हैं। इसके अलावा, एयरबस (Airbus) के साथ मिलकर पहले से ही लगभग 70 C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का प्रोग्राम चल रहा है, जिनमें से अधिकांश भारत के वडोदरा प्लांट में ही बनाए जा रहे हैं।

इतना ही नहीं, वायुसेना 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद और पुराने होते हॉक ट्रेनर विमानों को बदलने के लिए 100 से अधिक नए ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल करने की योजना पर भी तेजी से काम कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: इस टेंडर के तहत कुल कितने विमान खरीदे जाएंगे?

उत्तर: इस रक्षा सौदे के तहत भारतीय वायुसेना के लिए कुल 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे।

Q2: इस परियोजना में कौन-सी प्रमुख भारतीय कंपनियां शामिल हैं?

उत्तर: इस दौड़ में टाटा, महिंद्रा डिफेंस और सरकारी कंपनी HAL (हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

Q3: क्या ये सभी विमान भारत में ही बनेंगे?

उत्तर: नहीं, शुरुआती करीब 20 प्रतिशत विमान सीधे तैयार हालत में मिलेंगे, जबकि बाकी के अधिकांश विमान भारत में ही विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर बनाए जाएंगे, जिसमें 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा।

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रिपोर्टर: Gunja Pandey

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