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युद्ध के बदले तौर-तरीकों के लिए तैयार भारतीय सेना, IAF के बेड़े में जुड़ेंगे आधुनिक हथियार

युद्ध के बदले तौर-तरीकों के लिए तैयार भारतीय सेना, IAF के बेड़े में जुड़ेंगे आधुनिक हथियार

क्या आपने कभी सोचा है कि भविष्य के युद्ध कैसे लड़े जाएंगे? अब जंग सिर्फ गोलियों और टैंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस और आसमान में भी लड़ी जा रही है। इसी बदलते दौर को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपनी सैन्य ताकत को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है।

संसद में पेश की गई रक्षा मंत्रालय (MoD) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना अब भविष्य के 'हाइब्रिड वॉरफेयर' (Hybrid Warfare) यानी संकर युद्ध से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना (IAF) भी अपनी मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने के लिए लगातार आधुनिक हथियारों और विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर रही है।

पारंपरिक हथियारों के साथ नॉन-काइनेटिक डोमेन पर जोर

संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को रखी गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सेना ने पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को उभरते हुए नॉन-काइनेटिक डोमेन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ लिया है। इसका मतलब है कि दुश्मन से निपटने के लिए केवल मैदानी ताकत ही नहीं, बल्कि तकनीकी मोर्चे पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।

  • पैदल सेना (Infantry), मैकेनाइज्ड फोर्सेस और आर्टिलरी का आधुनिकीकरण।
  • लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली मिसाइलें और मजबूत ISR (इंटेलीजेंस, सर्विलांस और रीकॉनेसेंस) सिस्टम।
  • दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नेस्तनाबूद करने के लिए डायरेक्ट-ऊर्जा हथियारों (Directed-Energy Weapons) की एंट्री।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तीनों सेनाओं (थल सेना, वायुसेना और नौसेना) के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए नए बुनियादी ढांचे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सैनिकों की तेजी से तैनाती की जा सके।

साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी माहिर हो रही सेना

आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। इसे देखते हुए भारतीय सेना ने साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षेत्र में अपनी ताकत कई गुना बढ़ा ली है।

मुख्य बिंदु:

  • देश के अहम नेटवर्क को सुरक्षित रखने और साइबर ऑपरेशंस के लिए विशेष साइबर यूनिट्स का गठन किया गया है।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर यूनिट्स को स्पेक्ट्रम डोमिनेंस के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है।
  • पूरे देश में एक यूनिफाइड काउंटर-ड्रोन ग्रिड तैयार किया जा रहा है।

भारतीय वायुसेना (IAF) का आधुनिकीकरण

जहां एक तरफ थल सेना अपनी जमीन और साइबर सीमाओं को मजबूत कर रही है, वहीं भारतीय वायुसेना भी पीछे नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि चालू वित्त वर्ष में कई बड़े अधिग्रहण कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

वायुसेना के बेड़े में सर्विलांस एयरक्राफ्ट, लंबे समय तक आसमान में रहने वाले ड्रोन (Long-endurance drones), मिसाइलें और ट्रांसपोर्ट विमान शामिल किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम पर भी तेजी से काम चल रहा है, जिसके तहत फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत में ही राफेल विमानों के निर्माण का प्रस्ताव दिया है।

'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देते हुए रक्षा मंत्रालय स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तकनीक और रणनीति—दोनों मोर्चों पर खुद को अत्यधिक सक्षम बना रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: हाइब्रिड वॉरफेयर क्या होता है?

Ans: हाइब्रिड युद्ध एक ऐसी युद्ध रणनीति है जिसमें पारंपरिक सैन्य हमलों के साथ-साथ साइबर हमले, सूचना युद्ध (Information warfare) और आर्थिक मोर्चे पर रणनीतिक प्रहार शामिल होते हैं।

Q2: MRFA प्रोग्राम क्या है?

Ans: MRFA (Multi-Role Fighter Aircraft) कार्यक्रम के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद और देश में उनके निर्माण की योजना है।

Q3: काउंटर-ड्रोन ग्रिड का क्या काम है?

Ans: यह एक ऐसा सुरक्षा तंत्र है जो दुश्मन के ड्रोन या मानवरहित विमानों का समय रहते पता लगाकर उन्हें हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है।

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रिपोर्टर: Mamata Pathak

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