कुदरत का कहर कब और किस रूप में टूट पड़े, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के शहाबगंज और चकिया क्षेत्र में मंगलवार का दिन ऐसा ही खौफनाक मंजर लेकर आया, जब आसमान से गिरी आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई। अलग-अलग गांवों में हुए इन हादसों में एक तरफ जहां एक मूक पशु की जान चली गई, वहीं चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
तीन गांवों में एक साथ आफत
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को मौसम के अचानक करवट बदलने और तेज गर्जना के साथ क्षेत्र के तीन अलग-अलग गांवों में वज्रपात (Lightning Strike) की घटनाएं हुईं। सबसे पहले पालपुर ग्राम सभा के गयापुर गांव से दुखद खबर सामने आई, जहां किसान लोकनाथ की एक भैंस अचानक आकाशीय बिजली की चपेट में आ गई। जोरदार धमाके के साथ हुए इस हादसे में भैंस की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। राजस्व विभाग की टीम से लेखपाल राजेश कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारी ने बताया कि मृत भैंस का नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की आधिकारिक कार्रवाई पूरी की जाएगी ताकि पशुपालक को मुआवजा मिल सके।

रामशाला और खोजापुर में झुलसे लोग
सिर्फ मवेशी ही नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी भी इस कुदरती कहर का शिकार बनी। रामशाला और खोजापुर गांव में हुई बिजली दुर्घटना में चार ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- भृगुनाथ विश्वकर्मा (58 वर्ष) - निवासी रामशाला
- लीलावती (28 वर्ष) - निवासी खोजापुर
- सोनी देवी (38 वर्ष) - निवासी खोजापुर
- छाया (29 वर्ष) - निवासी खोजापुर
इन सभी को तुरंत आनन-फानन में संयुक्त जिला चिकित्सालय चकिया में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में इनका इलाज चल रहा है।
डॉक्टरों ने दी घायलों पर अपडेट
संयुक्त जिला चिकित्सालय चकिया के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. आरबी सिंह ने घायलों की स्वास्थ्य स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि बिजली की चपेट में आए चारों मरीजों का इलाज प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित उपचार मिलने के कारण फिलहाल सभी की हालत स्थिर है और खतरे से बाहर हैं।
प्रशासन की अपील: पशुओं का कराएं पंजीकरण
इस बीच, प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र के सभी पशुपालकों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। लेखपाल राजेश कुमार ने कहा कि सभी किसान और पशुपालक अपने मवेशियों का समय पर पशु पंजीकरण जरूर करवाएं। सरकारी नियमों के मुताबिक, आपदा या दुर्घटना में पशु हानि होने पर तभी आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है जब पशु का वैध पंजीकरण होता है।
उधर, रसिया क्षेत्र में बंगालीपुर नहर के पास भी कुछ बकरियों के बिजली की चपेट में आने की चर्चा है, हालांकि प्रशासनिक तौर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. शहाबगंज और चकिया में यह हादसा कब हुआ?
Ans: यह घटना मंगलवार को हुई जब अचानक मौसम खराब होने के बाद आकाशीय बिजली गिरी।
Q2. घायलों का इलाज कहां चल रहा है?
Ans: सभी चार घायलों को संयुक्त जिला चिकित्सालय चकिया में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति स्थिर है।
Q3. पशु हानि होने पर सरकारी मदद के लिए क्या जरूरी है?
Ans: प्रशासन के अनुसार, पशुओं का आधिकारिक पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि आपदा राहत कोष से मुआवजा मिल सके।