पत्रकारिता की दुनिया को झकझोर देने वाले 11 साल पुराने यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। तहलका मैगजीन के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल (61) को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने अपनी ही जूनियर सहयोगी के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया है।
कोर्ट के इस फैसले ने मई 2021 में गोवा की सेशन कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की पीठ ने मामले की समीक्षा के बाद तेजपाल को दोषी पाया है।
क्या था साल 2013 का पूरा मामला?
यह घटना नवंबर 2013 की है, जब गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित 'थिंकफेस्ट' (ThinkFest) कार्यक्रम के दौरान तेजपाल पर अपनी एक सहकर्मी के साथ लिफ्ट के भीतर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगा था। पीड़िता का आरोप था कि तेजपाल ने 7 और 8 नवंबर 2013 को होटल की लिफ्ट में उसके साथ जबरदस्ती की और आपराधिक बल का प्रयोग किया।
तेजपाल पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था:
- धारा 376: बलात्कार
- धारा 354 A: यौन उत्पीड़न
- धारा 354 B: महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला
- धारा 341 व 342: गलत तरीके से रोकना और बंधक बनाना
निचली अदालत का फैसला क्यों बदला गया?
साल 2021 में गोवा की फास्ट-ट्रैक अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को 'संदेह का लाभ' देकर बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा पुलिस और राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में अभियोजन पक्ष (राज्य सरकार) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि निचली अदालत ने पीड़िता की गवाही को नजरअंदाज करते हुए पीड़िता का ही मीडिया ट्रायल जैसा रवैया अपनाया। ट्रायल कोर्ट ने एक पीड़िता से दुष्कर्म के समय कैसे व्यवहार करने की उम्मीद की जाती है, इस रूढ़िवादी धारणा के आधार पर फैसला सुनाया था जो पूरी तरह गलत था।
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा संदेश
यह मामला केवल एक हाई-प्रोफाइल व्यक्ति के खिलाफ अदालती लड़ाई का नहीं था, बल्कि इसने भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न और शक्तियों के दुरुपयोग पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी। हाईकोर्ट द्वारा निचली अदालत के बरी करने के फैसले को रद्द करना उन महिलाओं के विश्वास को मजबूत करता है जो कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाती हैं।