चंदौली: विंध्य एक्सप्रेसवे के खिलाफ 16वें दिन भी गरजा किसान मोर्चा, पचोखर में राजस्व टीम को बिना नापी बैरंग लौटाया
चंदौली | 28 जुलाई 2026
विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण और भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले बिछिया धरना स्थल पर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। एक तरफ जहाँ धरना स्थल पर किसान डटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ गांवों में पंचायतें कर आगे के बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
👉 पचोखर में किसानों का कड़ा विरोध: बिना नोटिस नापी करने पहुंची टीम को खदेड़ा
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक और भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने बताया कि सोमवार को राजस्व विभाग की टीम विंध्य एक्सप्रेसवे के सीमांकन के लिए ग्राम पचोखर पहुंची थी।
टीम के पहुँचते ही पीड़ित किसानों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। किसानों का सीधा सवाल था:
"जब तक किसानों को आधिकारिक नोटिस नहीं दिया जाता, तब तक जमीन की नापतौल क्यों की जा रही है? बिना नोटिस और प्रक्रिया के हम अपनी जमीन का सीमांकन किसी कीमत पर नहीं होने देंगे।"
किसान उग्र विरोध पर उतर आए, जिसके कारण राजस्व टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा। गौरतलब है कि इससे पहले भी ग्राम परेवा में राजस्व टीम को किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।
🎤 काजीपुर में हुई बड़ी पंचायत: चंदौली मुख्यालय पर 'डेरा डालो' महापंचायत की तैयारी
आंदोलन को और धार देने के लिए ग्राम काजीपुर में कई गांवों के पीड़ित किसानों की एक अहम पंचायत आयोजित की गई।
- शामिल प्रमुख गांव: काजीपुर, सुण्डेहरा, भतीजा, नेवादा, खरखोली, प्रीतमपुर और तेजोपुर।
- अध्यक्षता: संयुक्त किसान मोर्चा के श्रवण मौर्या ने की।
- प्रमुख उपस्थिति: अशोक सिंह, नीरज सिंह, जीतेन्द्र प्रधान, रामजन्म मास्टर, रामनारायण, संतोष यादव समेत दर्जनों किसान मौजूद रहे।
पंचायत में तय किया गया कि इसी सप्ताह गांव-गांव जाकर बैठकें की जाएंगी और जल्द ही चंदौली जिला मुख्यालय पर 'डेरा डालो' किसान महापंचायत का आयोजन कर आंदोलन को तेज किया जाएगा।
✊वार्ता नहीं, तो एक्सप्रेसवे नहीं: किसानों ने आर-पार की जंग का किया ऐलान
बिछिया में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन किसी कीमत पर छीनने नहीं देंगे।
किसान मोर्चा की प्रमुख मांगें और रुख:
- यूपीडा (UPEIDA), जिला प्रशासन और पीड़ित किसानों के बीच पहले उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की जाए।
- जब तक वार्ता के जरिए किसानों की समस्याएं नहीं सुलझतीं, तब तक अधिग्रहण की किसी भी प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
- किसानों का स्पष्ट नारा है: "वार्ता से पहले कोई नापी नहीं... जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे!"
धरने पर मुख्य रूप से *वेटरन्स एसोसिएशन मंडल प्रवक्ता* मणि देव चतुर्वेदी, राजीव मौर्या, गोपाल सिंह, लल्लन चौहान, लालता चौहान, महेन्द्र राम, दशरथ, संदीप कुमार और वीरेंद्र कुमार उपस्थित रहे। वहीं चौहान सेना के जिलाध्यक्ष छागूर चौहान ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों के इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया।