विंध्य एक्सप्रेस-वे का विरोध चंदौली में एकजुट हुए किसान संगठन, संयुक्त किसान मोर्चा का गठन एक्सप्रेस-वे वापस नहीं तो वोट नहीं का दिया नारा
चंदौली | 21 जुलाई 2026
चंदौली में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के आह्वान पर बिछिया स्थित धरना स्थल पर क्षेत्र के विभिन्न किसान संगठनों और प्रभावित गांवों के किसानों की एक महत्वपूर्ण पंचायत आयोजित की गई। इस पंचायत में आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए 'संयुक्त किसान मोर्चा' के गठन का बड़ा ऐलान किया गया।
इन प्रमुख संगठनों ने मिलाया हाथ
किसान हितों की रक्षा और उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए अब 5 बड़े किसान संगठन एक मंच पर आ चुके हैं:
- भारतीय किसान यूनियन
- अखिल भारतीय किसान महासभा
- अखिल भारतीय किसान सभा
- किसान विकास मंच
- किसान-मजबूर संयुक्त मोर्चा
"जब सरकार के पास अन्य विकल्प मौजूद हैं, तो फिर किसानों की लहलहाती उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण कर उन्हें भूमिहीन बनाने पर आमादा क्यों है? जब तक प्रशासन वार्ता नहीं करता, अधिग्रहण की कोई कार्यवाही नहीं होने दी जाएगी।"
— मणि देव चतुर्वेदी, संयोजक (किसान संघर्ष मोर्चा)
आंदोलन की अगली रणनीति: घर-घर अनाज संग्रह और 'वोट नहीं' का बहिष्कार
संयुक्त किसान मोर्चा ने सर्वसम्मति से आंदोलन को गति देने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं:
- 24 घंटे का अनिश्चितकालीन धरना: बिछिया धरना स्थल आंदोलन का मुख्य केंद्र रहेगा, जहाँ प्रतिदिन एक गांव 24 घंटे के लिए अनिश्चितकालीन धरने की कमान संभालेगा।
- ‘एक घर-एक मुट्ठी अनाज’ अभियान: गांव-गांव जाकर राशन और जनसमर्थन जुटाने के लिए यह विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।
- 'एक्सप्रेस-वे नहीं तो वोट नहीं': प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी-छोटी पंचायतें कर जनप्रतिनिधियों का विरोध और चुनाव बहिष्कार का संकल्प लिया जाएगा।
- हस्ताक्षर अभियान: पीड़ित किसानों को जागरूक करने और एकजुट करने के लिए व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
प्रशासन को चेतावनी: वार्ता नहीं तो गांव में टीम का घेराव
मोर्चा के संयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यूपीडा (UUPIDA) और जिला प्रशासन को तुरंत किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करनी होगी। यदि बिना संवाद के भूमि अधिग्रहण की कोई भी कार्यवाही शुरू की गई, तो गांवों में आने वाली सर्वे टीमों का कड़ा विरोध किया जाएगा।
एक सप्ताह बाद समीक्षा बैठक की जाएगी, जिसके बाद:
- विशाल किसान महापंचायत
- जिला मुख्यालय तक किसान तिरंगा यात्रा
- भूख हड़ताल एवं आमरण अनशन
जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।
बीकेयू जिलाध्यक्ष हाउस अरेस्ट, किसानों ने बताया 'प्रशासनिक तानाशाही'
पंचायत के दौरान माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया जब भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान को पुलिस प्रशासन द्वारा उनके घर पर ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया। किसानों ने पुलिस और प्रशासन के इस रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे तानाशाही करार दिया।
बैठक में ये प्रमुख चेहरे रहे मौजूद
पंचायत की अध्यक्षता अशोक सिंह तथा संचालन मणि देव चतुर्वेदी ने किया।
- संबोधित करने वाले प्रमुख नेता: अलाउद्दीन (जिला सचिव, BKU), श्रवण मौर्या (जिलाध्यक्ष, किसान महासभा), एडवोकेट लाल चंद यादव (किसान सभा), राम अवध सिंह (किसान विकास मंच), दीनानाथ श्रीवास्तव (किसान मजदूर मोर्चा), रतन सिंह, अन्ना हजारे, अशोक यादव, प्रो. राम जन्म मौर्या, धनंजय उपाध्याय, एडवोकेट अभिषेक सिंह, विद्या शंकर सिंह, गोपाल सिंह, अवनीश सिंह, बीरेंद्र कुमार सिंह, आलोक सिंह, हकीम सुलेमानी एवं राम नारायण।
- उपस्थित किसान: डॉ. राजीव मौर्या, प्रभाकर सिंह, जिउत मौर्या, कन्हैया, भोला चौहान, दारा विश्वकर्मा, जवाहिर, गुलाब विश्वकर्मा समेत सैकड़ों प्रभावित किसान मौजूद रहे।