Breaking
► स्थानीय भाषा में भाषण की शुरुआत कर पीएम मोदी ने पंजाब की संस्कृति का मान बढ़ाया। ► विंध्य एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज, वेटरंस एसोसिएशन ने कहा यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला ► हॉर्मुज़ में महाशक्ति का सरेंडर? जानिए कैसे समुद्र की तलहटी में डूब रही है अमेरिकी साख! (सबसे बेहतरीन) ► मर जाएंगे पर जमीन नहीं देंगे! विंध्य एक्सप्रेस-वे के खिलाफ चंदौली में भड़के किसान, अब एक मुट्ठी अनाज; से चलेगा आंदोलन ► हक की लड़ाई में उतरे चन्दौली के पूर्व सैनिक, प्रवक्ता मणिदेव चतुर्वेदी जी के समर्थन में 17 जुलाई को धरना स्थल पहुंचेंगे सैकड़ों जांबाज ► Army Retirement Mistake: क्या आपने भी DSP अकाउंट को PDA में नहीं बदला? हो सकता है बड़ा नुकसान ► यूपी पंचायत चुनाव 2026: प्रधानी का चुनाव लड़ना है तो तुरंत बनवा लें ये 10 डॉक्यूमेंट्स, नहीं तो कट जाएगा पत्ता ► दुश्मनों के वार से ज्यादा, अपनों के प्यार वाले मुखौटों से डर क्यों लगता है ► बड़ी खबर: यूपी में प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष भी बने प्रशासक, चुनाव तक संभालेंगे कुर्सी ► देश के रक्षक को पेंशन नहीं, नेताओं को जीवनभर की ऐश ► स्थानीय भाषा में भाषण की शुरुआत कर पीएम मोदी ने पंजाब की संस्कृति का मान बढ़ाया। ► विंध्य एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज, वेटरंस एसोसिएशन ने कहा यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला ► हॉर्मुज़ में महाशक्ति का सरेंडर? जानिए कैसे समुद्र की तलहटी में डूब रही है अमेरिकी साख! (सबसे बेहतरीन) ► मर जाएंगे पर जमीन नहीं देंगे! विंध्य एक्सप्रेस-वे के खिलाफ चंदौली में भड़के किसान, अब एक मुट्ठी अनाज; से चलेगा आंदोलन ► हक की लड़ाई में उतरे चन्दौली के पूर्व सैनिक, प्रवक्ता मणिदेव चतुर्वेदी जी के समर्थन में 17 जुलाई को धरना स्थल पहुंचेंगे सैकड़ों जांबाज ► Army Retirement Mistake: क्या आपने भी DSP अकाउंट को PDA में नहीं बदला? हो सकता है बड़ा नुकसान ► यूपी पंचायत चुनाव 2026: प्रधानी का चुनाव लड़ना है तो तुरंत बनवा लें ये 10 डॉक्यूमेंट्स, नहीं तो कट जाएगा पत्ता ► दुश्मनों के वार से ज्यादा, अपनों के प्यार वाले मुखौटों से डर क्यों लगता है ► बड़ी खबर: यूपी में प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष भी बने प्रशासक, चुनाव तक संभालेंगे कुर्सी ► देश के रक्षक को पेंशन नहीं, नेताओं को जीवनभर की ऐश
Homeताजा खबरें...
ताजा खबरें

मर जाएंगे पर जमीन नहीं देंगे! विंध्य एक्सप्रेस-वे के खिलाफ चंदौली में भड़के किसान, अब एक मुट्ठी अनाज; से चलेगा आंदोलन

मर जाएंगे पर जमीन नहीं देंगे! विंध्य एक्सप्रेस-वे के खिलाफ चंदौली में भड़के किसान, अब एक मुट्ठी अनाज; से चलेगा आंदोलन


विंध्य एक्सप्रेस वे का कड़ा विरोध मर जाएंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे चंदौली में किसानों का आंदोलन हुआ और तेज

चंदौली (उत्तर प्रदेश) | 16 जुलाई 2026


विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के खिलाफ चंदौली के बिछिया में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में गठित 'किसान संघर्ष मोर्चा' अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अडिग है। आंदोलन को धार देने के लिए किसानों ने अब एक अनोखी और संगठित रणनीति तैयार की है, जिसके तहत हर दिन एक अलग गांव के किसान धरने की कमान संभालेंगे।

👉बारी-बारी से गांव संभालेंगे धरने की कमान

भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता और किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक मणि देव चतुर्वेदी ने बताया कि आंदोलन को और अधिक संगठित और मजबूत किया जा रहा है।

मोर्चे की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि धरने को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना एक-एक गांव के लोग मंच का संचालन करेंगे। इसी क्रम में आज अदसण ग्राम सभा के किसानों ने मंच संभाला।

⚡24 घंटे के क्रमिक अनशन पर बैठे ये किसान:
अदसण ग्राम सभा से पांच किसान—विजेंद्र, अरुण कुमार सिंह, अमित कुमार, हरिहर और बैजनाथ—अगले 24 घंटे के लिए क्रमिक धरने पर बैठ गए हैं।

👉ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा राज, छीन रहे हमारे पूर्वजों की जमीन"

अदसण ग्राम सभा के आक्रोशित किसानों ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। किसानों का कहना है:

  • ⚡कम बची है जमीन: पीढ़ियों से बंटवारा होते-होते अब किसानों के पास महज एक या दो बीघा जमीन ही बची है।
  • ⚡अस्तित्व का संकट: अगर सरकार जबरन इस बची-कुची जमीन का भी अधिग्रहण कर लेगी, तो किसान और उनका परिवार भूखों मर जाएगा।
  • ⚡तुलना: किसानों ने इस जबरन भूमि अधिग्रहण की तुलना 'ईस्ट इंडिया कंपनी' के दमनकारी शासन से की है।

👉एक मुट्ठी अनाज से मिल रहा है आंदोलन को समर्थन

इस आंदोलन को क्षेत्र के दर्जनों गांवों का भारी जनसमर्थन मिल रहा है। एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए ग्रामीण अपने घरों से एक-एक मुट्ठी अनाज धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए भेज रहे हैं।

👉समर्थन देने वाले प्रमुख गांव:


  • पीपरपतिया, फत्तेपुरकला, काँटा, परेवा
  • खुरुहूजा, पड़्या, सोनडेहरा, भतीजा
  • विजयनारायणपुर, हथियानी और अन्य समीपवर्ती ग्रामीण इलाके।

बारी-बारी से इन सभी गांवों के किसान आने वाले दिनों में धरने पर बैठेंगे और मंच का संचालन करेंगे। किसानों का एक ही साफ नारा है—"मर जाएंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।"

👉धरने पर मौजूद रहे प्रमुख किसान

आज के प्रदर्शन और बैठक के दौरान मुख्य रूप से गोपाल सिंह, विनोद चौहान, मनोज सिंह, राम दुलारे कन्नौजिया, संदीप सिंह, मनोज कुमार सिंह, राजेश सिंह, राज कुमार, ऋषिमुनी सहित पचासों की संख्या में किसान मुस्तैद रहे।

🔗 Related Posts